कहानी

Posted: 4 months ago

वो जा रही है, बस यही एक लब्ज गूंज रहा था मेरे दिल में। यूं तो आज कोचिंग का आखिरी दिन था फिर भी आज सुबह भी मुझे लग रहा था बहुत समय है, अभी बात कर लूंगा। वैसे मुझे आइंस्टीन की थ्योरी समझने में भी ज्यादा वक़्त नहीं लगा पर पता नहीं क्यूं ये थ्योरी मुझसे हो ना सकी। एक साल बीत दिया पर बात ही नहीं की। हमारी कहानी में बस अभी माहौल ही बनाया जा रहा है डाईलॉग तो जैसे आये ही नहीं । वैसे मुझे ये उम्मीद ना थी कि मेरी पढ़ाई भी कभी किसी को इंप्रेस करने के काम आएगी । पहली बार ही सही दिमाग ने दिल की मदद तो की। क्लास में अक्सर मेरे नंबर अच्छे आते थे। पहली पंक्ति का विद्यार्थी था तो सबकी निगाह मेरे पर ही रहती थी बस मेरी ही निगाह एक पर अटक गई वैसे तो क्लास की सारी लड़कियो से बात हो ही जाती थी पर उसी से कभी बात नहीं हो सकी।

    आज वो मेरे पास गुजरी शायद उसको भी इंतजार था कि मै आज तो कुछ बोलू मगर हम तो मुक फिल्म बना रहे थे कुछ नहीं बोला हमारी क्लास छत पर लगती थी। नीचे इतने के लिए वो जीने की तरफ चल दी ।जीने पर कुछ 16 सीढ़ियों था, ये भी आज ही पता चला। उसका सीढ़ियों पे रखा हर एक कदम मेरी धड़कने बढ़ाए जा रहा था। पहली बार लगा जैसे कुछ दूर जा रहा है कुछ अजीब से बैचेनी लगी मुझे समझ ही नहीं आया क्या करू। वो अब एग्जिट गेट तक पहुंच चुकी थी कुछ समझ नहीं आया मुझे और मैंने ऊपर छत से ही उसको जोर से चिल्ला के बाय बोल दिया और हा जब आपको कुछ ना समझ आए तो आप भी कुछ ना करे बेहतर यही होता, आज जान लिया मैंने । क्युकी वो वापस मुड़ के देखी मुझे वो भी बिना किसी भाव को अपने चेहरे पर लाए। मै तो गया मैंने समझ लिया आज तो तुम बेटा पिटे, वो भी बुरी तरह से। वो वापस आने लगी, मेरी तरफ अब तो मुझे कुछ सूझ ही नहीं रहा था। वहीं 16 सीढ़ियों जिनको उसके जाते वक़्त कभी खत्म ना हो कि दुआ दे रहा था वहीं रास्ता जिसे में प्यार से देख रहा था, सब मुझे बोझिल लगने लगे। वो जैसे ही मेरे पास आई मेरे मुझे से अचानक ही sorry निकल गया। अरे यार ये क्या किया तुमने sorry बोल दिए कमाल करते हो यार sorry....... सच में पगला गए हो तुम एक दम। यही सब मै मन ही मन सोच रहा था। खैर उसने अपनी खामोशी तोड़ी चेहरा उसका अभी भी गंभीर ही था पर उसने पास आकर बोला "बाय" । सिर्फ बाय सिर्फ और सिर्फ बाय । मैंने अपनी सफाई में थोड़ा लड़खड़ाती आवाज में बोला "वो आज last day था तो सोचा तुमको भी बाय बोल दू।" उसने कहा " ok ठीक है तुम ये यही बोल देते बिना मतलब पूरी कोचिंग का अटेंशन ले लिया" । इस बार उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी मगर बात तो उसकी सही थी। अब उसको ये कौन समझाए कि ये बाय भी मैंने कितनी हिम्मत के बाद बोला था। खैर उसने बेस्ट ऑफ लक for your एग्जाम बोला और वापस चली दी। मैंने भी जबाव में यही कहा और ये छोटी से गुफ्तगू एक मुस्कान पर समाप्त हुई। और फिर उसको मै जाते हुए देखता ही रहा। मैं तो कर रहा था उसको जाने ही ना दू अपने पास बिठा लू और जी भर कर बाते करू । क्या बात करूंगा ये तो नहीं पता पर बाते करू यही सोच रहा है । पर ये सपने सुहाने लड़कपन के थे मुझे पता था ये सब मुमकिन नहीं था अभी। फिजिक्स का विद्यार्थी हूं इतना तो हाइपोथेसिस बनाने का अधिकार मेरा भी है मै भी इतना सोचा के खुश तो हो ही सकता था। DDLJ के शाहरुख की तरह मै भी मन ही मन में पलट पलट पलट बोल रहा था पर हम कोई शाहरुख तो थे नहीं लेकिन वो काजोल जरूर थी मेरी लेकिन मेरी काजोल इस बार पलटी नहीं। हाय ये शाहरुख और उसकी मोहब्बतें। बस फिल्मों में ही हो सकता है ये सब असल जिंदगी में नहीं मुझे लगा ये प्यार व्यार वाली लकीर ही ना है मेरे हाथ में। मै पूरी बस उसकी बाते मन ही मन दोहराता है और अपने चेहरे पर एक मुस्कान लिए से गया।